ये बात 1990 के दशक की है जब हम गायों को चराने के लिए जंगल में जाया करते थे। कई बार हमें एक अद्भुत सी चीज जमीन पे पड़ी या कहीं पेड़ या किसी झाड़ी में दिख जाया करती थी, बड़ों से पूछने का जवाब मिला कि ये तारों का गू है और अगर उसे कोई गिरता हुआ पकड़ ले तो वो रातों-रात लखपति बन जाता है।
सच बताऊं तो बचपन में दो चीजों की बहुत खोज रही एक तो मिस्टर इंडिया वाली घड़ी और दूसरा तारों का गू गिरता हुआ पकड़ना है।
यह तो चलो बचपन की बात थी पर आखिर वह चीज है क्या, बहुत कम लोग जानते हैं और हमारे हिमाचल में अगर किसी से पूछो तो जवाब एक ही होता की तारे का गू है या कुछ लोग कहते हैं कि कोई कीड़ा।
अब यह असल में क्या है कहां से आता है आज मैं उसी के बारे में आपको थोड़ा सा जानकारी दे देता हूं ताकि आप भी बच्चों के सवालों का सही से जवाब दे सके या जिसको यह चीज नहीं मालूम है उनको थोड़ा ध्यान दे सकें।
इसको अंग्रेजी मैं प्रेइंग मेंटिस कहते है और हिंदी में बद्धहस्त कीट कहते है| ये हरी सी दिखने वाली चीज़ जिसे हम सब तारे का गु कहते हैं असल में ओत्तेका है| प्रेइंग मैंटिस अपने अंडो को इस के अंदर रखता है ताकि उनको ठण्ड, बरसात आदि में बचाया जा सके| अपने अंडो को इसके अंदर रख कर और ये बोरी से बना कर माँ अपने बच्चों की सुरक्षा का प्रभंध करने के बाद अपनी देह त्याग देती है, या यूँ कहें की उसकी मृत्यु हो जाती है|
अब जब बसंत आती है तो ये बचे इसमें से बाहर आ जाते हैं और एक मेरा अनुमान है की इसी को खा कर वो कुछ समय तक बड़े होते है और फिर उसके बाद वो स्वयं सक्षम हो जाते हैं भोजन जुटाने के लिए
इस चित्र में देखिए किस तरह एक प्रयिंग मैंटिस ने एक मक्खी को अपना भोजन बनाया है|
